196. एकता ही मुक्ति है
श्रीकृष्ण
कहते हैं
“इस शरीर में स्थित पुरुष को साक्षी (द्रष्टा), अनुमन्ता,
भर्ता, भोक्ता, महेश्वर और परमात्मा भी कहा जाता है”' (13.23)।
इस जटिलता को समझने के लिए आकाश सबसे अच्छा उदाहरण है। इसे इसके स्वरूप के आधार पर
अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है जैसे एक कमरा, एक घर,
एक बर्तन आदि। मूलतः, आकाश एक है और बाकी इसकी अभिव्यक्तियां हैं।
श्रीकृष्ण आश्वासन देते हैं “जो पुरुष (आत्मा) को, और गुणों सहित
प्रकृति को, तत्त्व से जानता है, वह फिर दोबारा जन्म नहीं लेता। उनकी वर्तमान स्थिति चाहे जैसी भी हो, वे मुक्त हो जाते हैं” (13.24)। घटनाएँ प्रकृति में गुणों के कारण घटित होती
हैं
और पुरुष उन्हें सुख और दुःख के रूप में अनुभव करता है। इस
सत्य का बोध ही सुख-दुःख के द्वन्द्व से मुक्ति है अर्थात् वास्तविक स्वतंत्रता। दूसरे, यह मुक्ति उसी क्षण घटित हो जाती है जब हम इस सत्य का बोध कर लेते हैं -हमारी
वर्तमान स्थिति कैसी भी हो, चाहे हम कितने ही अज्ञानी, दयनीय या निर्धन क्यों न हों।
श्रीकृष्ण
ने पहले मुक्ति के बारे में एक अलग दृष्टिकोण से समझाया कि सभी स्थितियों में
गुणों के द्वारा ही कर्म किए जाते हैं; जो
अहंकार से मोहित हो जाता है,
वह सोचता है ‘मैं कर्ता हूँ’ (3.27)। जो यह जानता है कि
गुणों के साथ गुण परस्पर क्रिया करते हैं, वह मुक्त हो जाता है (3.28)।
मुक्ति
का अर्थ केवल सुख-दुःख से स्वतंत्रता ही नहीं बल्कि
कर्म करने की वास्तविक स्वतंत्रता भी है। इस सन्दर्भ में यह प्रश्न उठता है कि यदि
पाप या अपराध कहे जाने वाले कर्मों की अनुमति दी जाए तो
समाज कैसे टिकेगा? यह दृष्टिकोण बाह्य संयम के माध्यम से
घृणा को व्यक्त करने तक दबाकर रखने की अनुमति देता है। ध्यान देने योग्य है कि
मुक्ति केवल बंधनों से छुटकारा पाने का नाम नहीं है; यह घृणा का पूर्ण विसर्जन भी है। घृणा के समाप्त होते ही व्यक्ति अस्तित्व के
साथ सामंजस्य में स्थापित हो जाता है। उस अवस्था में अपराध और पाप की कोई गुंजाइश
नहीं रहती। अस्तित्व के साथ यह सामंजस्य ही मोक्ष है।
मानव
शरीर जो एक अद्भुत चमत्कार है, इस सामंजस्य का सर्वोत्तम
उदाहरण है। इसमें लगभग तीस ट्रिलियन कोशिकाएँ और लगभग उतनी ही जीवाणु (बैक्टीरिया)
सह-अस्तित्व में रहते हैं। इस संतुलन को बनाए रखने के लिए हमें कोई विशेष प्रयास
नहीं करना पड़ता -यह एकत्व और अंतर्निहित सामंजस्य के कारण स्वाभाविक रूप से घटित
होता है।

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