24. आत्मा पुराने शरीर को बदलती है
श्रीकृष्ण कहते हैं आत्मा न मरती है और न मारी जाती है और अज्ञानी ही अन्यथा सोचते हैं। यह अजन्मा , नित्य (अविनाशी) , सनातन और पुरातन है। श्रीकृष्ण यह भी कहते हैं कि जिस प्रकार हम नए वस्त्र पहनने के लिए पुराने वस्त्रों को छोड़ देते हैं , ठीक उसी प्रकार आत्मा भौतिक शरीरों को बदल देती है ( 2.19, 2.20) । वैज्ञानिक सन्दर्भ में इसे ‘ ऊर्जा संरक्षण ’ के नियम एवं द्रव्यमान और ऊर्जा की अंतर-परिवर्तनीयता के सिद्धांत द्वारा अच्छी तरह से समझाया जा सकता है। यदि ऊर्जा को आत्मा का प्रतीक माना जाता है तो भगवान् श्रीकृष्ण के वचन बिल्कुल स्पष्ट हो जाते हैं। ऊर्जा के संरक्षण का नियम कहता है कि ऊर्जा को कभी नष्ट नहीं किया जा सकता है बल्कि केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है। उदाहरण के लिए थर्मल पावर स्टेशन थर्मल ऊर्जा को बिजली में परिवर्तित करते हैं। एक बल्ब बिजली को प्रकाश में बदलता है। यह सिर्फ रूपांतरण है , कोई विनाश नहीं है। एक बल्ब का एक सीमित जीवनकाल होता है। जब यह फ्यूज हो जाता है तो इसे एक नए बल्ब से बदल दिया जाता है लेकिन बिजली बनी रहती है। यह उसी तरह है जैसे ...