Posts

Showing posts with the label व्यक्त और अव्यक्त

8. व्यक्त और अव्यक्त

Image
पतवार (rudder) से जुड़े एक छोटे से यंत्र ‘ट्रिम टैब’ में एक हल्का सा बदलाव एक बड़े जहाज की दिशा को बदल देता है। इसी तरह गीता का अध्ययन करने के लिए एक हल्का सा प्रयास हमारे जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। हालाँकि लोग गीता को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखते हैं फिर भी कुछ मूलभूत अवधारणाओं को समझकर इसे आसानी से आत्मसात् किया जा सकता है। गीता आंतरिक अनुभूति के लिए प्रारंभिक शिक्षा से लेकर स्नातकोत्तर स्तर (पोस्ट ग्रेजुएशन) तक की एक शाश्वत पाठ्यपुस्तक है। सम्भव है कि गीता के पहले अध्ययन में बहुत कम सिद्धांत समझ में आएँ परंतु यदि हम इसे व्यक्त और अव्यक्त के दृष्टिकोण से समझने का प्रयास करें तो इसके सिद्धांत सरलता से आत्मसात् किए जा सकते हैं। अव्यक्त वह है जो हमारी इन्द्रियों से परे है और व्यक्त वह है जो इन्द्रियों के दायरे में है।             व्यक्त की कहानी महाविस्फोट (Big Bang) से शुरू होती है। यह तारों के निर्माण के साथ जारी रहती है। इन तारों के केंद्र में परमाणु मिलकर भारी रासायनिक तत्वों का निर्माण करते ...