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Showing posts from August, 2026

221. साधन और साध्य - दोनों शुद्ध हों

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  श्रीकृष्ण आसुरी स्वभाव वालों के बारे में आगे कहते हैं “ यह मानते हुए कि यह सारा संसार शारीरिक इच्छाओं की पूर्ति के लिए है , ऐसे लोग मृत्युपर्यंत सांसारिक चिंताओं में डूबे रहते हैं ( 16.11) । सैकड़ों इच्छाओं , काम और क्रोध के बन्धन में बंधे हुए , वे अपनी इन्द्रियों की तृप्ति के लिए अन्यायपूर्ण तरीकों से धन संचय करने का प्रयास करते हैं ” ( 16.12) । जब इच्छाएँ पूरी नहीं होतीं तो क्रोध स्वाभाविक है , इस प्रकार वे साथ-साथ चलते हैं। इसीलिए इन्द्रियों पर नियंत्रण भगवद्गीता के प्रमुख उपदेशों में से एक है। जब कोई संचय को लक्ष्य बनाता है तो उसकी प्रवृत्ति उसे प्राप्त करने की ओर अपनी सारी ऊर्जा लगाने की होती है। इस मार्ग पर व्यक्ति उक्त लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपनाए गए सभी साधनों को उचित ठहराने की कोशिश करता है चाहे वे साधन नैतिक हों या अनैतिक। इस प्रक्रिया में दूसरों को हड़पना शामिल है , यह संपत्ति या अच्छे काम का श्रेय हो सकता है ; यह बाजार में हिस्सेदारी हड़पना या मन में जगह बनाना हो सकता है , जिसे स्वार्थ के लिए ' दूसरों को प्रभावित करना ' कहा जाता है , जैसा कि सामाजि...

220. तर्क से परे

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  श्रीकृष्ण ने अस्तित्व की व्याख्या करते हुए कहा कि यह प्रकृति और पुरुष का संयोग है जो दोनों अनादि हैं। गुण और विकार प्रकृति से उत्पन्न होते हैं (13.20)। जबकि प्रकृति कारण और प्रभाव के लिए जिम्मेदार है , पुरुष उन्हें सुख और दुःख के द्वन्द्वों के रूप में अनुभव करता है (13.21)। श्रीकृष्ण ने आगे स्पष्ट किया कि वे नाशवान् प्रकृति से अतीत हैं और वे अविनाशी जीवात्माओं में उत्तम हैं , इसलिए उन्हें पुरुषोत्तम (परम पुरुष या परमात्मा) कहा जाता है (15.18)। यह पुनरावृत्ति हमें निम्नलिखित श्लोकों को समझने में मदद करेगी। श्रीकृष्ण कहते हैं “आसुरी स्वभाव वाले लोग कर्म और अकर्म में भेद नहीं कर पाते। उनमें न तो पवित्रता होती है , न आचरण , न सत्य ( 16.7) । वे कहते हैं कि संसार परम सत्य से रहित है , आधारहीन है , प्रभु से रहित है। यह संसार काम वासना से (स्त्री-पुरुष के पारस्परिक मिलन से) उत्पन्न हुआ है ” ( 16.8) । यह प्रकृति के स्तर पर जीवन जीना है जहाँ कारण और प्रभाव का प्रभुत्व है ; जहाँ तर्क ही हमारे अनुभव की हर चीज को परिभाषित करता है। अगला प्रश्न यह उठता है कि नाशवान् प्रकृति के स्तर पर का...