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13. सत्त्व, रज और तमो गुण

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सत्त्व , रजस् और तमस् नामक तीन गुण प्रकृति से उत्पन्न होते हैं। ये आत्मा को भौतिक शरीर से बाँधते हैं। ये हम सभी में विभिन्न मात्राओं में विद्यमान रहते हैं। सत्त्वगुण ज्ञान के प्रति आसक्ति पैदा करता है ; रजोगुण कर्म के प्रति आसक्ति उत्पन्न करता है ; और तमोगुण अज्ञान तथा प्रमाद की ओर ले जाता है। जिस प्रकार इलेक्ट्रॉन , प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के संयोजन से विविध पदार्थ बनते हैं , उसी प्रकार तीनों गुणों का संयोजन हमारे स्वभाव और कर्मों को प्रभावित करता है। यद्यपि हमारे जीवन में एक गुण प्रबल रहता है फिर भी किसी भी समय कोई एक गुण अन्य गुणों पर हावी हो सकता है। वास्तव में लोगों के बीच वार्तालाप और कुछ भी नहीं बल्कि उनके गुणों के बीच समन्वय है । जिस तरह विद्युत चुंबकीय क्षेत्र में रखा गया चुंबक (magnetic dipole) उसी क्षेत्र के साथ घूमता है , इसी प्रकार किसी गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में वस्तुएँ आकर्षित होती हैं। ऐसे कई भौतिक और रासायनिक गुण हैं। इसी तरह कर्म किसी कर्ता से नहीं बल्कि गुणों के कारण होता है। भगवान् श्रीकृष्ण भौतिक संसार में स्वचालितता यानी अपने आप होनेवाले कार्य की ...